सहारनपुर : बुधवार को महाशिवरात्रि पर्व मनाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। शिव भक्त कांवड़िये हर की पौड़ी हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल भरकर अपने गंतव्यों के लिए जा रहे हैं। शिव भक्त महाशिवरात्रि पर्व पर पवित्र गंगाजल से अपने आराध्य नाथो के नाथ भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इस बार जलाभिषेक के लिए नक्षत्रों के अनुसार महासंयोग बन रहा है। जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त में है। बुधवार को सुबह 4:40 बजे से जलाभिषेक का समय शुरू हो रहा है। जो मध्य रात्रि के बाद 2:28 बजे तक रहेगा।
आपको बता दें कि जैसे-जैसे महाशिवरात्रि पर्व नजदीक आ रहा है, शिव भक्तों की भीड़ शिव मंदिरों की ओर बढ़ रही है। हर की पौड़ी हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर आ रहे कावड़ियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। वहीं कावड़ियों के परिजन और स्थानीय लोग फूल मालाओं से कावड़ियों का स्वागत कर रहे हैं। मंगलवार सुबह से ही डाक कावड़िए भी जल लेकर दौड़ने लगे हैं। अब सभी जलाभिषेक करने की होड़ में हैं। लेकिन उन्हें जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त का भी इंतजार है। महाशिवरात्रि पर्व पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में मां बगलामुखी मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व सुबह 4:40 बजे शुरू होगा और चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त सुबह 4:40 बजे से 2:28 बजे तक है और महाशिवरात्रि का पावन योग रहने वाला है।
इस दौरान कावड़िए भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपने आराध्य भोले नाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। यह श्रावण मास है। श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है। यह पूरा मास भगवान शिव की प्रसन्नता का होता है। कल चतुर्दशी है, यानि महाशिवरात्रि का दिन। चतुर्दशी भगवान शिव की अति प्रिय तिथि मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कल आत्रेय नक्षत्र का योग भी बन रहा है। आत्रेय नक्षत्र भी भोले बाबा का अति प्रिय नक्षत्र है। जो बुधवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होकर शाम 5:53 बजे तक रहेगा। सुबह 4:40 बजे से कावड़िए भगवान का जलाभिषेक करेंगे और दोपहर, शाम, रात और ब्रह्म मुहूर्त तक जलाभिषेक और पूजा का विशेष अवसर है।
भगवान शिव को पवित्र गंगा जल से स्नान कराया जाता है। इससे पहले दूध, दही, शहद, मिठाई आदि का पंचामृत बनाकर स्नान कराने के बाद गंगाजल से जलाभिषेक किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव को भोग लगाया जाता है और उनके प्रिय मंत्रों का उच्चारण कर पूजा की जाती है। मान्यता है कि यदि कोई भी भक्त रात्रि में भगवान शिव की पूजा करता है तो उसे भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पंडित रोहित बताते हैं कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकली हैं, यही कारण है कि भगवान शिव को गंगाजल बहुत प्रिय है। यही वजह है कि शिव भक्त कावड़िए हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री से भी गंगाजल लाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान भोलेनाथ को प्रकृति का देवता माना जाता है। भगवान शिव जितना प्रकृति के करीब शायद ही कोई देवता हो। भगवान शिव की पूजा बेहद साधारण चीजों से की जाती है। भांग, धतूरा, ये सभी चीजें ऐसी वस्तुएं हैं जो सड़क किनारे आसानी से मिल जाती हैं। भांग को संस्कृत में विजया कहा जाता है। विजया अर्पित करने से जीवन में विजय की प्राप्ति होती है। भगवान शिव को भांग अर्पित करने से भोलेनाथ द्वारा विष पीने का प्रभाव समाप्त हो जाता है। इसीलिए भक्तगण भगवान शिव का भांग से अभिषेक करते हैं।

